एमएनसी में 300 को नौकरी का झांसा, 5 गिरफ्तार

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-नोएडा पुलिस ने पकड़ा कॉल सेंटर, दिखाते थे मंत्रालय की आईडी, प्रोसेसिंग के नाम पर मांगते थे 25 हजार

NOIDA NEWS: एमएनसी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर देशभर के बेरोजगार युवकों के साथ ठगी करने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश शनिवार को फेज वन और साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने किया।
ठगी का कॉल सेंटर फेज वन थाना क्षेत्र के सेक्टर छह में संचालित हो रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने ठगी करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्ताार किया। उनके पास से लैपटॉप मोबाइल और विभिन्न मंत्रालय के फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। ये लोग अब तक करीब 300 से ज्यादा लोगों से ठगी कर चुके है। इनके पांच बैंक खातों में 10 लाख रुपए को फ्रीज किया गया। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आज तक एक भी युवक को नौकरी नहीं दिलाई, बल्कि रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर हजारों रुपये ठगे। यह फर्जी कॉल सेंटर पहले नोएडा के सेक्टर दो में चल रहा था। आरोपी खुद को विभिन्न नामी कंपनियों और सरकारी मंत्रालयों जिसमें मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड इंप्लायमेंट की आईडी दिखाकर युवाओं का विश्वास जीतते थे।
एनसीआरीपी में दर्ज 25 शिकायत: एनसीआरपी पोर्टल पर भी इस गैंग से जुड़ी 25 से अधिक शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। एडिशनल डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बेरोजगार युवाओं का डाटा विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल से जुटाते थे।
इसके बाद कॉल सेंटर से फोन कर खुद को एचआर मैनेजर या रिक्रूटमेंट एजेंसी का अधिकारी बताते थे। युवकों को भरोसे में लेने के लिए मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी लगवाने का दावा किया जाता था।
25 हजार तक वसूलते थे पैसा: आरोपी रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, दस्तावेज सत्यापन और ट्रेनिंग के नाम पर दो हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक वसूलते थे। रकम मिलने के बाद या तो कॉल बंद कर दी जाती थी या फिर नई-नई फीस के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे। ठगी को असली दिखाने के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की फर्जी आईडी, लेटरहेड और दस्तावेज का इस्तेमाल कर रहे थे।
24 मोबाइल फोन बरामद: इसके अलावा फर्जी बैंक खातों, चेकबुक, डेबिट और क्रेडिट कार्ड का भी उपयोग किया जा रहा था। आरोपियों के पास से पांच लैपटॉप,24 मोबाइल फोन,तीन फर्जी मोहर, 11 फर्जी भारत श्रम विभाग की आईडी और 19 डेबिट/क्रेडिट/पैन व अन्य कार्ड बरामद हुए हैं।
तीस हजार में लिया था फ्लोर: पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ठगी के लिए गिरोह के सरगना ने 30 हजार रुपए महीने के हिसाब से सेक्टर छह में एक फ्लोर किराए पर लेकर रखा था। इसी जगह पर ठगी के लिए पूरा सेटअप तैयार किया गया था। बेरोजगार युवकों को जो लोग कॉल करते थे उन्हें भी ठगी की पूरी जानकारी थी। इसके एवज में उन्हें सैलरी के साथ मोटा कमीशन भी मिलता था। सरगना सभी कर्मचारियों को रोजाना एक लक्ष्य देता था जिसे उन्हें पूरा करना होता था।
हरियाणा और दिल्ली के हैं आरोपी: आरोपियों की पहचान हरियाणा के गुरुग्राम निवासी 32 साल के दुर्गेश कुमार और 29 साल सोनू कुमार, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी 29 साल पुनीत सिंह, सहारनपुर निवासी 24 साल अमन शर्मा और और बिहार के सिवान निवासी आलोक के रूप में हुई है। दुर्गेश ही गिरोह का सरगना है। सभी आरोपी वर्तमान में नोएडा के अलग-अलग जगह पर किराए पर फ्लैट और कमरा लेकर रह रहे हैं।