-संविधान की मूल भावना के विपरीत,SC के 2019 के निर्णय दिलाया याद
NOIDA NEWS: विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्रा ने बुधवार को UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर गंभीर आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया।
कलराज मिश्रा ने कहा कि “शिक्षण संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक हैं, लेकिन किसी एक वर्ग विशेष को सदैव संदेह के दायरे में रखकर उनके विरुद्ध निगरानी एवं अनुशासनात्मक टीम गठित करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी अत्यंत घातक है।”
उन्होंने स्मरण कराया कि UGC द्वारा साल 2012 में बनाए गए नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान और निष्पक्ष थी, जिसमें किसी भी छात्र को पूर्वाग्रह के आधार पर अपराधी मानने की प्रवृत्ति नहीं थी।
जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के साल 2019 के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि कोई भी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए। झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना भी न्याय का अनिवार्य हिस्सा है।
सामाजिक समरसता के खिलाफ
परिषद के ध्येय को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा” विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद का मूल उद्देश्य ब्राह्मण समाज को धुरी बनाकर समाज के अंदर ‘सामाजिक समरसता’ स्थापित करना है, जबकि UGC के ये नए नियम सामाजिक समरसता के विरुद्ध कार्य करते हैं और समाज में विभाजनकारी खाई पैदा करते हैं।”
संविधान के नियमों का उल्लंघन
कलराज मिश्रा ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 सभी नागरिकों को समानता और सम्मान की गारंटी देते हैं, और ये प्रस्तावित विनियम इन मूल अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उक्त उक्त विनियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधानों को पूरी तरह हटाया जाए।
शिकायत निवारण प्रणाली को सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए। झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति में विरुद्ध सजा का प्रावधान किया जाए। शिकायत निवारण समिति में भी सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो।






