फेलिक्स हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने हिंदी में प्रिस्क्रीप्शन लिख मनाया हिन्दी दिवस

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नोएडा। फेलिक्स हॉस्पिटल में बुधवार को 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया गया। इस उपलक्ष्य में डॉक्टर ने मरीजों के लिए हिंदी में इलाज की पर्चियां बनाकर मिसाल पेश की और हिंदी भाषा के प्रति सम्मान दर्शाया। फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. डी.के गुप्ता ने कहा कि आमतौर पर आपने देखा होगा कि डॉक्टर जो प्रिस्क्रीप्शन लिखते हैं वह अंग्रेजी में होता है और आम इंसान के कम ही समझ में आता है, लेकिन हिंदी दिवस के मौके पर अस्पताल के डॉक्टर्स ने सुुंदर अक्षरों में मरीजों के लिए हिंदी में प्रिस्क्रीप्शन लिखा। हिंदी में उपचार केे लिए लिखी गई इस पर्ची में दवा का नाम भी हिंदी में ही लिखा गया था। दवा कैसे खानी है और कब खानी, इसकी जानकारी भी हिंदी में दी गई थी। हिंदी दिवस को खास बनाने के लिए ऐसा किया गया ताकि लोगों के बीच मिसाल पेश की जा सके। जब हिंदी में प्रिस्क्रीप्शन लिखा तो नए मरीज देखकर थोड़ा हैरान जरूर हुए लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी में ही प्रिस्क्रीप्शन लिखा जा रहा है। डॉ शीतल ने बताया कि हिंदी महज भारत की नहीं दुनिया की प्रमुख भाषाओं से एक है। हिंदी भारत की पहचान भी है और सम्मान भी। हमें हिंदी बोलने पर गर्व होना चाहिए |
हिंदी भारत और दुनिया के अन्य देशों में बसे भारतीयों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करती है। भारत में 22 भाषाएं और उनकी 72507 लिपि हैं। एक ही देश में इतनी सारी भाषाओं और विविधताओं के बीच हिंदी एक ऐसी भाषा है, जो हिंदुस्तान को जोड़ती है। देश के हर राज्य में बसे जनमानस को हिंदी के महत्व के बारे में समझाने और इसके प्रसार प्रचार के लिए भारत हिंदी दिवस मनाता है।
भारत में अंग्रेजी के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के उद्देश्य से हिंदी दिवस को मनाने की शुरुआत हुई। महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है लेकिन इसे भारत की राजभाषा जरूर माना गया है। हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी का उपयोग होता है।
भारत में हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत देश की आजादी के बाद हुई। 1946 को 14 सितंबर के दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। फिर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने 14 सितंबर के दिन को हिंदी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया। हालांकि आधिकारिक तौर पर पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

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