दर्द में तड़पते हुए न गुजरें कैंसर पेशंट्स इसलिए जरूरी है पैलिएटिव केयर: डॉ अभिमन्यु राणा

0
55

Noida: आखिरी स्टेज में कैंसर लाइलाज हो जाता है। अमूमन ऐसे मरीजों को डॉक्टर घर भेज देते हैं। वहीं, लाचार घरवाले भी दर्द से तड़पते मरीज के आखिरी सांसें गिनने का इंतजार करते रहते हैं। ऐसे ही मरीजों और उनके घरवालों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए पैलिएटिव केयर जरूरी है। इसके तहत मरीजों के घरवालों को उनकी देखभाल की ट्रेनिंग भी दी जाती है। फेलिक्स अस्पताल में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, pain and palliative care एक्सपर्ट डॉ अभिमन्यु राणा बताते हैं कि कैंसर रोगियों को तरह-तरह के शारीरिक लक्षण होते हैं, जैसे कि दर्द, सांस फूलना, खून का रिसाव, पेशाब करने में तकलीफ, दस्त, पानी की कमी हो जाना, बेसुधी, थकान, भोजन निगलने में असमर्थता, नींद ना आना, चिंता, डिप्रेशन इत्यादि। उनको मानसिक परेशानियां भी होने लगती हैं। इसलिए कैंसर से जूझ रहे मरीजों को कैंसर का पता लगने पर जितना जल्द हो सके पैलिएटिव केयर के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए। जो मेंटल हेल्थ को ठीक रखने में बेहद मददगार है। आमतौर पर कैंसर स्पेशलिस्ट का फोकस कैंसर को जड़ से ठीक करने या कंट्रोल करने के कारण, केवल शरीर पर ही होता है और मानसिक परेशानियों को नजर अंदाज कर दिया जाता है। जब रोग फैल जाता है और जड़ से ठीक होना संभव नहीं होता, तो पैलिएटिव केयर ही एक विकल्प बचता है।
क्या है पैलिएटिव केयर?: पैलिएटिव केयर एक विशेष तरह की देखभाल है, जिसमें कैंसर का पता चलते ही इसे आरंभ कर देने से रोगियों की शारीरिक तकलीफों के साथ-साथ उनकी मानसिक समस्याओं से भी राहत मिलती है। यह जानते हुए भी कि अब रोग को जड़ से ठीक करना संभव नही है। पैलिएटिव केयर का उद्देश्य रोगियों तथा उनके परिजनों को सभी परेशानियों से राहत दिला कर, उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हुए, उनको यथासंभव आत्मनिर्भर बनाना होता है, जिससे वह शांति के साथ अपना बचा हुआ जीवन जी सकें। पैलिएटिव केयर से रोगी, कई सालों तक भी अपना काम काज करते हुए सही से जीवन जी सकते हैं। पैलिएटिव केयर स्पेशलिस्ट अन्य स्पेशलिस्ट, साइकोलोजिस्ट, पैलिएटिव केयर नर्से, फि़जिय़ोथेरेपिस्ट इत्यादि की टीम की देखरेख में पैलिएटिव केयर ओपीडी, डे-केयर, दाखिल कर के और घर में भी दी जा सकती है। फेलिक्स हॉस्पिटल कैंसर के मरीजों के लिए होमकेयर की सुविधा उपलब्ध करवाता है। रोगी को पैलिएटिव केयर सेंटर में बिना जरुरत की जांचें, प्रोसीजर, दवाएं तथा दाखिले की जरुरत न होने के कारण, यह काफी किफायती होती है। इसके साथ-साथ रोगी के परिजनों को ट्रैन किया जाता है की रोगी की देखभाल घर में कैसे की जा सकती है। आगे आने वाली समस्याओं की रोकथाम तथा पहचान कैसे करें तथा इमरजेंसी पडऩे पर हॉस्पिटल लाने की परामर्श दी जाती है। पैलिएटिव केयर में दवा, इंजेक्शन या कीमोथैरेपी जैसी किसी विधि से इलाज नहीं किया जाता है। बल्कि पैलिएटिव केयर में रोगी के जीवन जीने की क्वालिटी को सुधारा जाता है। कोशिश की जाती है कि मरीज बीमार है, मगर वो दूसरे के बजाय खुद पर ही अधिक निर्भर हो। ऐसा करके वह शेष जीवन को आराम से काट सकता है। ऐसा माना जाता है कि पैलिएटिव केयर से पेशेंट कई सालों तक अच्छे से जीवन जी लेते हैं।
आराम से घर पर मिल जाती है पैलिएटिव केयर: कैंसर का ट्रीटमेंट लंबे समय तक चलता है। ऐसे में मरीजों को ज्यादा वक्त के लिए अस्पताल में नहीं रखा जा सकता। डॉक्टर ऐसे मरीजों को घर जाने की अनुमति दे देते हैं। लेकिन घर पर मरीज को पैलिएटिव केयर मिल सके, इसके लिए परिवार के सदस्यों को भी कई बार पैलिएटिव केयर की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें उन्हें बताया जाता है कि घर पर मरीज की देखभाल कैसे करनी है। पैलिएटिव केयर में सभी चीजें शामिल होती हैं जैसे- घाव की सफाई करना, ड्रेसिंग करना, नाक में नली से खाना देने का तरीका, नली बदलने का तरीका आदि। पैलिएटिव केयर की मदद से मरीज घर पर रहकर आराम से इलाज करा लेता है।