Noida News: डॉ. राम मनोहर लोहिया ने आजादी से पहले ही ला दी थी देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार: पंडित रवि शर्मा

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Noida: ब्राहमण रक्षा दल के मुख्य संरक्षक, नोएडा सेक्टर 22 आरडबलयुए संरक्षक व समाजवादी पार्टी के कार्य कर्ता पंडित रवि शर्मा ने समाजवादी विचारों के महान समर्थक डाक्टर राम मनोहर लोहिया की पुण्य तिथि पर उन्हें नमन किया है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता सेनानियों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ साथ स्वतंत्रता उपरांत भारतीय राजनीति में अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया। अगर जय प्रकाश नारायण जी ने देश की राजनीति को स्वतंत्रता के बाद बदला तो वहीं राम मनोहर लोहिया जी ने देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार आजादी से पहले ही ला दी थी। अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्वी समाजवादी विचारों के कारण अपने समर्थकों के साथ ही राम मनोहर लोहिया जी ने अपने विरोधियों के मध्य भी अपार सम्मान हासिल किया। 23 मार्च 1910 को अकबरपुर, फैजाबाद (उ.प्र.) में पिता हीरालाल जी के घर जन्मे राम मनोहर लोहिया जी के पिता पेशे से एक शिक्षक, सच्चे राष्ट्रभक्त एवं गाँधीजी के अनुयायी थे। जब वे गाँधीजी से मिलने जाते तो राम मनोहर लोहिया जी को भी अपने साथ ले जाया करते थे। बनारस से इंटरमीडिएट और कोलकाता से बी.ए. (आर्नस) प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के पश्चात उच्च शिक्षा के लिए लंदन के स्थान पर बर्लिन का चुनाव किया। अर्थशास्त्र में डाक्टरेट की उपाधि केवल 02 वर्षो में प्राप्त कर ली। जर्मनी में 04 साल व्यतीत करके राम मनोहर लोहिया जी स्वदेश वापस लौटे। किसी सुविधापूर्ण जीवन के स्थान पर राम मनोहर लोहिया जी ने जंग ए आजादी के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी। सन् 1933 में मद्रास पहुँचने पर वे गाँधीजी के साथ मिलकर देश को आजाद कराने की लड़ाई में शामिल हो गए। सन् 1935 में लोहिया जी को कॉंग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया। 08.08.1942 को गाँधीजी ने भारत छोडो़ आंदोलन का ऐलान किया तो इस आंदोलन में लोहिया जी ने संघर्ष के नए शिखरों को छूआ। आग्वादा का शेरÓ कहे जाने वाले राम मनोहर लोहिया जी ने गोवा मुक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश की आजादी के समय राम मनोहर लोहिया जी तथा जवाहर लाल नेहरु में कई मतभेद पैदा हो गए थे जिसकी वजह से दोनों के रास्ते अलग हो गए। 30.09.1967 को राम मनोहर लोहिया जी को नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल, अब जिसे लोहिया अस्पताल कहा जाता है, में पौरूष ग्रंथि के आपरेशन के लिए भर्ती किया गया जहाँ 12.10.1967 को उनका देहांत हुआ।