शुद्ध ब्राह्मण का सम्मान ही क्षत्रिय रक्त का परिचायक है: जगतगुरु रामभद्राचार्य जी

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Noida: श्री हनुमान सेवा न्यास और श्रीराम राज फाउंडेशन द्वारा जगतगुरु रामभद्राचार्य द्वारा नोएडा स्टेडियम में संचालित श्री रामकथा का आठवाँ दिन शाम 5 बजे से प्रारंभ हुआ। श्री राम कथा अपने अंतिम पायदान पर है, श्रद्धालुओं की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है ऐसे में जगतगुरु रामभद्राचार्य जी भी पूरी ऊर्जा से राम कथा का वाचन कर रहे हैं। आज कथा में जंगल में सुपरनखा द्वारा राम को प्रेम प्रस्ताव और श्री राम द्वारा आतंकवादिनी सुपर्णखा की नाक कान काटने का आदेश का वर्णन किया। श्री राम कथा में गुरु जी ने लव का रूप बताया जो श्री राम ने सुपरनखा को समझाया एल से लेक ऑफ़ टियर्स यानी आँसुओ की झील , वो से ओसीन ऑफ़ सारो यानी दुखो का समुद्र , वी वैली ऑफ़ डेथ यानी मौत की खाई, ई एंड ऑफ़ लाइफ यानी जीवन का अंत इसलिए इस प्रेम से हमें वास्ता नहीं और श्री राम ने कहा की चरित्र से समझौता मैं कदापि नहीं कर सकता। इसके साथ ही सीता माँ के हरण का व्याख्यान करते हुए कह रहे हैं कि सीता जी को आभास था की कुछ अनहोनी हो सकती है किंतु क्षत्रिय कुल की वधू होने के नाते यदि साधु को सम्मान नहीं दिया तो कुल मर्यादा का नाश हो जाएगा और सच्चा क्षत्रिय या क्षत्राणी सदैव ब्राह्मणो का आदर करते हैं। रामायण की चौपाइयों के साथ गुरु जी ने युवाओं को श्री राम के चरित्र और आदर्शों के पालन का आदेश दिया और बताया की एक भी क्षण नष्ट करना युवाओं के लिए विनाशकारी है और बताया जो विनम्रता से झुका है उसको कोई झुका नहीं सकता और जो अकड़कर रहता है वो टूट जाता है। श्री राम की भक्ति का उदाहरण देते हुए गुरु जी ने कहा की श्री राम की महिमा लिए कारण ही उनके भक्त हनुमान का मंदिर श्री राम से भी अधिक है , व्यक्ति को कभी अपने कृत्य का अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि उसके पीछे ईश्वर का हाथ है सिफऱ्। गुरु जी ने कहा कि प्रभु कृपा के आगे भौतिक आँखों का कोई योगदान नहीं है। मैंने 5 वर्ष की अवस्था में संपूर्ण गीता कंठस्थ कर ली और 230 ग्रंथों की रचना कर डाली। मीडिया प्रभारी अवनीश सिंह ने बताया कि कल कथा का आखऱिी दिन है और आठ दिन तक कथा पूर्ण रूप से सफल हुई और समापन भी स्मरणीय होगा।