Ghaziabad News: “विवेक से वैराग्य,वैराग्य से विज्ञान और विज्ञान से शांति ” गोष्ठी संपन्न

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Ghaziabad: केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “विवेक से वैराग्य,वैराग्य से विज्ञान और विज्ञान से शांति ” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह करोना काल में 466 वां वेबिनार था।
वैदिक प्रवक्ता अतुल सहगल ने विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए बताया कि महर्षि दयानन्द कृत सत्यार्थ प्रकाश से ही वस्तुतः उद्धरित है।इस अमर ग्रन्थ के नवम समुल्लास में महर्षि ने मोक्ष के साधनों की विस्तृत व्याख्या की है।अध्यात्म की राह पर आगे बढ़ने के लिए मनुष्य जीवन के पांच क्लेशों को दूर करने की आवश्यकता है,जिनमें से एक राग है।राग की विस्तृत परिभाषा और व्याख्या प्रस्तुत करते हुए वक्ता ने राग के अभाव को वैराग्य बताया। तत्पश्चात वक्ता ने विज्ञान की संक्षिप्त परिभाषा रखी और कहा कि भौतिक और अध्यात्मिक उन्नति का मार्ग विज्ञान सम्मत ही हो सकता है।विषय का तीसरा प्रमुख बिंदु था — शांति।सामान्य जन प्रायः शांति के संपूर्ण अर्थ का बोध नहीं रखते और इसीलिए सर्वांगीण उन्नति के अवरोधों को दूर नहीं कर पाते।उन्होंने शांति की पूर्ण व्यवहारिक परिभाषा प्रस्तुत करते हुए इसके चारों अर्थ — नीरवता,शुद्धता,संतुलन और सामंजस्य का अवलोकन किया। साथ ही तथ्य का स्पष्टीकरण किया कि किस प्रकार मनुष्य अपने व्यवहार में विवेक से वैराग्य,वैराग्य से विज्ञान और विज्ञान से शांति की स्थिति को प्राप्त होता है।शांति के अभाव में न भौतिक प्रगति संभव है न अध्यात्मिक।इस परिपेक्ष्य में विवेक,वैराग्य और विज्ञान शांति के ही साधन बन कर प्रस्थापित हो जाते हैं।वर्तमान जगत की अवस्था का अवलोकन करते हुए कहा कि आज जगत में शांति की न्यूनता और अशांति का आधिक्य है।इसका कारण विवेक,वैराग्य और विज्ञान — इन तीनों की कमी है।इनकी वृद्धि करनी होगी।तभी मोक्ष मार्ग पर पग बढ़ पाएंगे। हमारे प्राचीन विद्वानों और
महर्षियों द्वारा सम्पादित सत्य ज्ञान के मणि हमारे सामने बिखरे पड़े हैं।अवश्यकता है उनकी पहचान करके उनका उपयोग करने की और अपना जीवनोद्धार करने की।वर्तमान जगत की विषम परिस्थितियों और दूषित वातावरण में इस बात का महत्त्व और अधिक हो जाता है।
मुख्य अतिथि आर्य नेत्री कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष उषा सूद ने भी मानव जीवन में शांति कैसे मिले पर अपने विचार रखे।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने संचालन करते हुए कहा कि विज्ञान कितनी ही उन्नति कर ले पर सच्ची शान्ति तो अध्यात्म में है।
राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि योग शान्ति प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है। गायिका प्रवीना ठक्कर, रविन्द्र गुप्ता,कौशल्या अरोड़ा,सुनीता अरोडा़,ईश् आर्य,ईश्वर देवी विजय खुल्लर,रजनी चुघ,जनक अरोडा़,प्रतिभा कटारिया,कमला हंस आदि के मधुर गीत हुए।