Noida News: सेक्टर 46 के रामलीला ग्राउंड में हुआ भरत कैकेई संवाद, भरत मिलाप व खर दूषण वध की लीला का मंचन

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Noida: सेक्टर 46 के रामलीला ग्राउंड में चल रही श्रीराम लखन धार्मिक लीला में सातवें दिन भारत व कैकेई संवाद एवं भरत मिलाप तथा सूपर्णखा पंचवटी में आना और खर दूषण वध की लीला का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉक्टर बलविंदर शुक्ला द्वारा दीप प्रज्वलन कर रामलीला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर बलविंदर शुक्ला ने कहा कि प्रत्येक वर्ष होने वाली रामलीला से भी कुछ लोग सीख नहीं ले पाते और व बेवजह असत्य के रास्ते पर चल पड़ते हैं।
जबकि उन्हें पता होता है, कि सत्य के रास्ते पर चलकर उनकी मंजिल में थोड़ा समय तो लग सकता है। लेकिन उनकी जीत निश्चित है। वहीं असत्य के रास्ते पर चलकर हार का मुंह देखना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि राम लीला मंचन पहले से ही चला आ रहा है। पहले तो खुद कलाकार अपने मुख से बोल कर लीला का मंचन करते थे। जिसमें एक हास्य कलाकार होता था जो सबको लोटपोट कर देता था। लेकिन अब बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक युग के चलते ऐसा कम ही रामलीला में देखने को मिलता है। कि कलाकार अपनी वाणी से ही लीला का मंचन करता हो, अब मंच पर भूमिका कलाकार की दूसरा निभाता है। जबकि उसकी आवाज दूसरे की होती है।
पहले ऐसा नहीं था। उन्होंने कहा कि रामलीला देखने से लोग अपनी संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखते हैं। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में राकेश यादव, भरत प्रधान, सुबे यादव, महेंद्र यादव, दीपक विग, सुभाष भाटी, व डॉ हरीश त्रिपाठी मौजूद रहे। रामलीला वाचक पंडित कृष्णा स्वामी ने भरत कैकई संवाद के साथ रामलीला का शुभारंभ किया। रामलीला में भरत अपनी ननिहाल में वापस आते हैं।
और कैकेई कौशल्या के भवन में जाते हैं। जब केकई उन्हें बताती है कि राम के वनवास में उनका हाथ है। तभी भरत क्रोधित हो जाते हैं। उसी समय केकई का त्याग करते हुए अपने पिता का दाह संस्कार के बाद गुरु की आज्ञा से राम को लेने चित्रकूट जाते हैं। जब राम अयोध्या नहीं आते हैं तो वह उनकी खड़ाऊ लेकर चले आते हैं। इसके बाद श्रीराम तुरंत पंचवटी चले जाते हैं। पंचवटी में उनकी मुलाकात सुपर्णखा और नारद से होती है। इस दौरान सुपर्णखा का नाक काटने की लीला का मंचन तथा खर दूषण की वध की लीला का मंचन के बाद रावण की सभा में सुपणखा को बुलाना ,सुपणखा द्वारा नाक काटने की कहानी सुनाने के बाद। रावण क्रोधित हो जाते हैं।
इसके बाद रावण मारिच को लेकर पंचवटी में जाते हैं । तभी लक्ष्मण सीता संवाद एवं सीता के हरण की लीला के समय जटायु का वध करने की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष विपिन अग्रवाल द्वारा आए हुए सभी अतिथियों का सम्मान किया गया।