राष्ट्रपति ने किया भारत जल सप्ताह का उद्घाटन

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Greater Noida: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को जनपद गौतम बुद्ध नगर के इण्डिया एक्स्पो मार्ट ग्रेटर नोएडा में सातवें भारत जल सप्ताह का किया उद्घाटन। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। भारतीय सभ्यता में जल जीवन में ही नहीं जीवन के बाद की यात्रा में भी महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी जल स्रोतों को पवित्र माना जाता है। लेकिन फिलहाल स्थिति पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक लगती है। बढ़ती आबादी के कारण हमारी नदियों और जलाशयों की हालत बिगड़ रही है, गांव के तालाब सूख रहे हैं और कई स्थानीय नदियां विलुप्त हो गई हैं। कृषि और उद्योगों में पानी का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। पृथ्वी पर पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, मौसम का मिजाज बदल रहा है और बेमौसम अत्यधिक वर्षा आम हो गई है। ऐसे में जल प्रबंधन पर चर्चा करना बहुत ही सराहनीय कदम है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पानी का मुद्दा न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि उपलब्ध मीठे पानी की विशाल मात्रा दो या दो से अधिक देशों के बीच फैली हुई है। इसलिए, यह संयुक्त जल संसाधन एक ऐसा मुद्दा है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि 7वें भारत जल सप्ताह में डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, इजराइल और यूरोपीय संघ भाग ले रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच पर विचारों और प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान से सभी लाभान्वित होंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि पानी कृषि के लिए भी एक प्रमुख संसाधन है। एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में लगभग 80 प्रतिशत जल संसाधन का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जाता है। इसलिए जल संरक्षण के लिए सिंचाई में पानी का उचित उपयोग और प्रबंधन बहुत जरूरी है। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक प्रमुख पहल है। देश में सिंचित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए यह राष्ट्रव्यापी योजना लागू की जा रही है। जल संरक्षण लक्ष्यों के अनुरूप, इस योजना में प्रति बूंद अधिक फसल सुनिश्चित करने के लिए सटीक-सिंचाई और जल बचत प्रौद्योगिकियों को अपनाने की भी परिकल्पना की गई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि बढ़ती आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना आने वाले वर्षों में एक बड़ी चुनौती होगी। पानी का मुद्दा बहुआयामी और जटिल है, जिसके लिए सभी हितधारकों को प्रयास करने चाहिए। हम सभी जानते हैं कि पानी सीमित है और केवल इसका उचित उपयोग और पुनर्चक्रण ही इस संसाधन को लंबे समय तक बनाए रख सकता है। इसलिए, हम सभी को इस संसाधन का सावधानीपूर्वक उपभोग करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने लोगों से इसके दुरुपयोग के बारे में जागरूक होने और दूसरों को जल संरक्षण के बारे में जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस 7वें जल सप्ताह के दौरान विचार-मंथन के परिणाम इस पृथ्वी और मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने आम लोगों, किसानों, उद्योगपतियों और विशेषकर बच्चों से जल संरक्षण को अपनी नैतिकता का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसी तरह हम आने वाली पीढिय़ों को एक बेहतर और सुरक्षित कल का तोहफा दे पाएंगे।
सातवें भारत जल सप्ताह कार्यक्रम के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए सर्वप्रथम भारत के माननीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का उत्तर प्रदेश की धरती पर पहली बार आगमन होने पर उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से उनका स्वागत एवं हार्दिक अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने भारत का प्रधानमंत्री बनते ही उच्च प्राथमिक विषय उपलब्ध कराएं, जिनमें से एक स्वच्छता पेयजल आपूर्ति भी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जहां पर उपयुक्त अवसर है। कहा जाता है कि जहां की आबादी सर्वाधिक होती है वहां पर जीवन यापन करने के लिए उपयुक्त अवसर होते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य में भूगर्भ जल, सरफेस जल का पर्याप्त जल संसाधन है। उत्तर प्रदेश के क्रिटिकल जनपदों जैसे बुंदेलखंड के अंतर्गत आने वाले जनपद तथा बिंद क्षेत्र पर वर्तमान समय में सतही जल का पर्याप्त भंडारण हैं और हम भविष्य में भी भंडारण एवं जल का संरक्षण करने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से पिछले साढे 5 वर्षों में जल का प्रबंधन बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों एवं विंद क्षेत्रों में अधिक से अधिक हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हिमालय से आने वाली ज्यादातर नदियां सिल्ट लेकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती थी, जहां पर उनका चैनेलाइज नहीं हो पाया था, जिसमें से कुछ छोटी नदियां लुप्त प्राय हो गई थी, लेकिन वर्तमान समय में हमने उन नदियों को जीवित करने के लिए निरंतर प्रयास करते हुए 60 से अधिक नदियों को पुनर्जीवित करके उनमें जल संचालन का कार्य सुनिश्चित किया है। मुख्यमंत्री ने नमामि गंगा परियोजना के लाभ के बारे में विस्तारपूर्वक रूप से जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना से काफी अच्छे परिणाम प्राप्त हो रहे हैं, जिसमें से उत्तर प्रदेश में मां गंगा नदी के किनारे बसे शहर कानपुर में 14 लाख लीटर शिविर का पानी गंगा में गिरने के कारण मां गंगा जैसी नदी को प्रदूषित करता था, लेकिन वर्तमान समय में कानपुर शहर के शीशामऊ में शिविर पॉइंट पूरी तरह से समाप्त करने की कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सुनिश्चित की गई और आज वही पॉइंट सेल्फी प्वाइंट के रूप में जाना जाता है।
इस अवसर पर भारत सरकार के जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, भारत सरकार के राज्य मंत्री बिश्वेश्वर तुडु, भारत सरकार के राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, पुलिस आयुक्त आलोक सिंह, मण्डलायुक्त मेरठ मंडल मेरठ सेल्वा कुमारी जे0, प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा/ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ऋतु माहेश्वरी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण एवं देश व विदेश के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहें।